




दिनांक 28 अप्रैल 2026 को केशव माधव सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककोड़ में जल संरक्षण दिवस के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मनोज कुमार मिश्र जी एवं मुख्य वक्ता आचार्य श्री मनोज शर्मा जी रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ किया गया। मुख्य वक्ता आचार्य श्री मनोज शर्मा जी बताया कि जल संरक्षण का उद्देश्य ताजे पानी के प्राकृतिक संसाधन का सतत प्रबंधन करना , जलमंडल की रक्षा करना और वर्तमान एवं भविष्य की मानवीय मांगों को पूरा करना है। जल संरक्षण से जल संकट से बचा जा सकता है । इसमें इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सभी नीतियां, रणनीतियां और गतिविधियां शामिल हैं। जनसंख्या, परिवार का आकार और वृद्धि तथा समृद्धि, ये सभी कारक जल उपयोग की मात्रा को प्रभावित करते हैं। जलवायु परिवर्तन और अन्य कारकों ने प्राकृतिक जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा दिया है । यह विशेष रूप से विनिर्माण और कृषि सिंचाई के क्षेत्र में देखा जाता है ।कई देशों ने जल संरक्षण के लिए नीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया है। जल संरक्षण के लिए कई प्रमुख गतिविधियाँ हैं। इनमें से एक है जल की हानि , उपयोग और संसाधनों की बर्बादी । जल की गुणवत्ता को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाना । तीसरा है जल प्रबंधन प्रथाओं में सुधार करना जिससे जल का उपयोग कम हो या उसका लाभकारी उपयोग बढ़े।घरों, वाणिज्यिक क्षेत्रों और कृषि में पानी के उपयोग/हानि को कम करने के लिए तकनीकी समाधान उपलब्ध हैं। सामाजिक समाधानों से जुड़े जल संरक्षण कार्यक्रम आमतौर पर स्थानीय स्तर पर नगरपालिका जल उपयोगिताओं या क्षेत्रीय सरकारों द्वारा शुरू किए जाते हैं। विद्यालय के अध्यक्ष श्री अशोक गुप्ता जी, प्रबंधक श्री जगदीश प्रसाद ढोंडियाल जी, कोषाध्यक्ष श्री दिनेश सिंघल जी एवं सह व्यवस्थापक श्री कालीचरण जी ने जल संरक्षण के उपाय बताते हुए कहा कि मंजन करते समय, हाथ धोते समय या शेविंग करते समय नल खुला न छोड़ें। घर के नल, पाइप या टॉयलेट में लीकेज की जांच करें और उसे तुरंत ठीक करवाएं।शावर की तुलना में बाल्टी से नहाने में काफी कम पानी खर्च होता है।सब्जियां या फल धोते समय चलते नल की जगह एक टब में पानी भरकर धोएं। वाशिंग मशीन या डिशवॉशर का उपयोग तभी करें जब वे पूरी तरह भरे हों।पाइप की जगह बाल्टी और मग का उपयोग करें। एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर श्रीकृष्ण शर्मा जी ने बताया कि बारिश के पानी को इकट्ठा करने की तकनीक (छत प्रणाली) अपनाकर जल संरक्षण करें। जल संरक्षण के इस कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य जी ने मनोज कुमार मिश्र जी ने सभी आचार्यों एवं विद्यार्थियों को जल संरक्षण के लिए शपथ दिलाई।
